किंतु इस चकाचौंध भरी दुनिया और सफलता की गाथाओं के मध्य विमर्श का एक महत्वपूर्ण बिंदु विचारणीय है की उन बच्चों का क्या जिन्होंने 60-65% अंक अर्जित किया है। क्या उनके अभिभावकों के पास गर्व करने के लिए कुछ भी नहीं है? ऐसे छात्र और छात्राएँ जो किन्ही कारणों से इस परीक्षा में अच्छे अंक नहीं प्राप्त कर सके - अपने माता-पिता की आशाओं और आकांक्षाओं पर खरा नहीं उतर सके - वे निश्चित ही निराश और हताश होंगे। यह भी हो सकता है की उन्हें तरह-तरह के तानों का भी सामना करना पड़ रहा हो - यह पोस्ट ऐसे ही छात्र-छात्राओं और अभिवावकों को समर्पित है।
चलिए इतिहास के पन्नों से एक अत्यंत रोचक किस्सा सुनाता हूं। बात 1987 की है।यूरोप के देश इटली के रोम नामक नगर में एथलेटिक्स की विश्व चैंपियनशिप प्रतियोगिता का आयोजन चल रहा था। इसकी एक स्पर्धा में 1500 मी की दौड़ में भारत का प्रतिनिधित्व कश्मीरा सिंह कर रहे थे। 1500 मीटर की दौड़ में ट्रैक के कुल पौने चार चक्कर लगाने होते हैं। यानी पहले राउंड में कुल 300 मीटर और बाकी 3 राउंड में कुल 1200 मी। नियत समय पर दौड़ शुरू हुई...कश्मीरा सिंह ने दौड़ शुरू होते ही बढ़त बना ली। ट्रैक पे लगभग 40 से ज़्यादा धावक दौड़ रहे थे। पर कश्मीरा सिंह सबसे आगे थे। कमेंटेटर ने बताया...भारत का एथलीट सबसे आगे चल रहा है।
3rd Round तक कश्मीरा सिंह सबसे आगे चले। पर कमेंटेटर उनकी इस दौड़ से कतई इम्प्रेस नहीं था। वो पीछे चल रहे किन्ही दो अन्य धावकों पे निगाह रखे थे ।
बहरहाल चौथा और आखिरी राउंड शुरू हुआ। एक धावक बढ़ के कश्मीरा सिंह से आगे आ गया। और उसके बाद कश्मीरा सिंह उस भीड़ में खो गए और फिर कभी नहीं दिखे । बाद में जब हम लोगों ने Record Book देखी तो पता चला की शायद कश्मीरा सिंह 40 में से 38वें स्थान पे रहे ।
ज़िन्दगी की दौड़ में इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप पहले राउंड में आगे हैं कि नहीं। फर्क इस बात से पड़ता है कि फिनिशिंग लाइन पर सबसे पहले कौन पहुंचा। उस दौड़ में सोमालिया के Abdi Bile फिनिशिंग लाइन पे सबसे पहले पहुंचे और उन्होंने स्वर्ण पदक जीता ।
इतिहास में नाम Abdi Bile का दर्ज है न कि कश्मीरा सिंह का।
मित्रों.. ... .अभी तो ज़िन्दगी की Marathon दौड़ का बमुश्किल पहला राउंड पूरा हुआ है. ... ..फिनिशिंग लाइन पे न जाने कौन पहुंचेगा सबसे पहले। शुरू में बहुत तेज़ दौड़ने वाले ज़रूरी नहीं की इसी दमखम से लगे रहे।
सबसे आगे वो आएगा जो धैर्य-पूर्वक लगा रहेगा। जो बिना हार माने दौड़ता रहेगा। वो जिसकी निगाह लक्ष्य पे रहेगी।
जीतना ज़रूरी भी नहीं। मज़ा दौड़ पूरी करने में भी है ।
ज़िन्दगी की दौड़ में अक्सर 60 % वाले भी जीतते हैं।
याद रखना Chinese Bamboo....सबसे देरी से उगता है पर उगते ही 7 हफ्ते में 40 फुट का हो जाता है।
इस लिये दौड़ते रहो...रुकना मत...
और एक अंतिम विनती कि आप अपने बच्चो की तुलना किसी और से न करे...क्योकि हर एक बच्चा अद्वित्य है, अद्भुत है, अतुल्य है I

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