नए एसीएस महोदय में नेतृत्व में शिक्षा विभाग अपने दोगलेपन के नए स्तर पर उतर आया है। एक तरफ विभागीय पत्र के माध्यम से शिक्षकों को 4:30 अपराह्न तक विद्यालय में रुकने को बाध्य किया जा रहा है तो दूसरी तरफ समाचार पत्रों एवम अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर प्रोपेगैंडा फैलाया जा रहा है। जिसमें पिछले 10 वर्षों का एक तुलनात्मक आंकड़ा पेश करके आम जनों के बीच यह दुष्प्रचार किया जा रहा है की विद्यालय प्रातः 9 से 4 तक संचालित किया जा रहा है। और इसके लिए प्रति सप्ताह न्यूनतम 45 घंटे शैक्षणिक कार्य हेतु तय करने का हवाला दिया जा रहा है।जो की नई शिक्षा नीति के प्रावधानों के तहत तर्कसंगत है।किंतु इसमें नई शिक्षा नीति के कई प्रावधानों को तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। विभाग अत्यंत चतुराई से नई शिक्षा नीति के कई प्रावधानों को दरकिनार करते हुए शिक्षकों के खुलेआम शोषण में लिप्त है। शिक्षकों की छुट्टियों एवम EL सहित कई मुद्दों पर बिभाग की चुप्पी से इस बात की पुष्टि होती है।इस प्रकार से आम जनता के बीच शिक्षकों को एक बार पुनः विलेन सिद्ध करने का प्रयास किया जा रहा है। विभाग के इस कुत्सित प्रयास की कड़े शब्दों में भर्त्सना होनी चाहिए।अतः आप सभी शिक्षक साथियों से अनुरोध है की इस मैसेज को अधिक से अधिक शेयर करें ताकि शिक्षा विभाग के इस प्रोपेगैंडा का समय रहते पर्दाफाश किया जा सके।
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