पटना: बिहार में ट्रांसफर की राह देख रहे शिक्षकों को पटना हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। पटना हाईकोर्ट ने राज्य में शिक्षकों के ट्रांसफर-पोस्टिंग पर फिलहाल रोक लगा दी है।
🌼घटनाक्रम का विवरण:
हाल ही में, बिहार सरकार ने शिक्षकों की ट्रांसफर-पोस्टिंग की नई नीति लागू की थी। इसके तहत शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों से उनकी पसंदीदा पोस्टिंग के लिए आवेदन मांगे गए थे। लेकिन, इस नीति के खिलाफ औरंगाबाद के शिक्षकों द्वारा पटना हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी।
🌼कोर्ट में सुनवाई:
इस याचिका पर सुनवाई करते हुए, पटना हाईकोर्ट ने ट्रांसफर-पोस्टिंग पर फिलहाल रोक लगा दी। अदालत में शिक्षकों की ओर से अधिवक्ता मृत्युंजय कुमार ने और राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ललित किशोर ने अपने पक्ष रखे। जस्टिस प्रभात कुमार सिंह की अदालत ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया।
🌼प्रभाव का आकलन:
इस फैसले का असर लाखों शिक्षकों पर पड़ा है जो अपने ट्रांसफर का इंतजार कर रहे थे। यह निर्णय राज्य सरकार के लिए भी एक बड़ा झटका साबित हुआ है, जिसे अब अपनी नीति पर पुनर्विचार करना होगा।
🌼वरीय अधिवक्ता ललित किशोर का तर्क: राज्य सरकार ने शिक्षकों को 22 नवंबर 2024 तक स्थानांतरण और पदस्थापन के लिए विकल्प देने का निर्देश दिया था। सरकार ने स्पष्ट किया कि यदि शिक्षक इस तारीख तक विकल्प नहीं देंगे, तो राज्य सरकार अपने स्तर पर निर्णय लेगी।
🌼अधिवक्ता मृत्युंजय कुमार का तर्क: औरंगाबाद के शिक्षकों की ओर से दायर याचिका में यह कहा गया कि राज्य सरकार ने पुरुष शिक्षकों को दस सब-डिवीज़न और महिला शिक्षकों को दस पंचायतों का विकल्प दिया था, जो 2023 के नियमों के विरुद्ध है।
🌼पहले के नियम:2023 के अनुसार पुरुष और महिला शिक्षकों को तीन जिलों का विकल्प दिया गया था, जबकि नए नियम में विकल्प बढ़ा दिया गया है।
🌼आंकड़ों में:
1. गौरतलब है कि शिक्षा विभाग के अनुसार ई शिक्षाकोष पोर्टल पर करीब 1,50,000 से अधिक शिक्षकों ने ट्रांसफर के लिए आवेदन किया था।
2. ज्ञात आंकड़ों के अनुसार लगभग 75% शिक्षकों ने अपनी पसंदीदा पोस्टिंग के लिए आवेदन किया था।
3. इसमें से करीब 60% से अधिक शिक्षक सरकार की नई नीति का समर्थन कर रहे थे।
🌼प्रभाव और प्रतिक्रिया:
शिक्षकों का असमंजस: ट्रांसफर का इंतजार कर रहे बिहार के लाखों शिक्षक इस फैसले से प्रभावित होंगे।
सरकार का झटका: राज्य सरकार को अपनी नीति पर पुनर्विचार करना पड़ेगा, जिससे उनकी कार्यशैली पर सवाल उठे हैं।
🌼निष्कर्ष:
पटना हाईकोर्ट के इस फैसले ने राज्य में शिक्षा व्यवस्था के सुधार की दिशा में नई चुनौती खड़ी कर दी है। यह निर्णय राज्य सरकार और शिक्षकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है और अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होने की संभावना है।
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