15 दिनों में कमिटी की रिपोर्ट आने की बात कहकर तीन महीनों से झाल बजाया जा रहा है। इतना लेट लतीफी!
इतने महीनो से कौन सा नाटक चल रहा है , आखिर इन्हे पोस्टिंग ट्रांसफर करने से किसने रोका है?
सक्षमता पास शिक्षकों को गोल गोल घुमाकर "मामूली परीक्षा" का दिवाला ही निकाल दिया गया है।
राज्य कर्मी का दर्जा जब मामूली परीक्षा लेकर देने की बात भरी सभा में कही है माननीय मुख्यमंत्री साहब ने तो जिन शिक्षकों ने आपके एक आदेश पर तय किए गए मानकों के अनुसार पास कर अपनी काबिलियत दिखाई,उन्हें राज्यकर्मी की बात कहकर मिलने वाले लाभों से वंचित रखते हुए खाली पोस्टिंग-ट्रांसफर का झुनझुना बजाकर मीडिया में बहुत बड़ा सौगात और तोहफा की बात क्यों कही जा रही है?आखिर इन्हें शिक्षकों को चिढ़ाने में इतना मजा क्यों आ रहा है? जो काम आपको शुद्ध मन से करना चाहिए उसमें भी उलूल जुलूल बातें कर शिक्षकों का मानमर्दन करने पर क्यों तुले हुए हैं।
वाह रे मामूली परीक्षा और वाह रे शिक्षा व्यवस्था!
वास्तव में न तो मीडिया और न ही सरकार की कोई भी हमदर्दी शिक्षकों के प्रति है, दुर्भाग्य है शिक्षकों का जिन्होंने अपने छुद्र स्वार्थों की खातिर अपनी एकता को ताक पर रख दिया है।
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