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Thursday, October 10, 2024

"बिहार शिक्षा विभाग की नई स्थानांतरण नीतियों में व्याप्त विसंगतियां : प्रमुख आपत्तियां और सुधार की आवश्यकता"

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बिहार शिक्षा विभाग की नई स्थानांतरण नीतियों में व्याप्त विसंगतियां और हमारी आपत्तियां: सुधार की आवश्यकता
टीचरनामा की टीम ने हाल ही में बिहार के शिक्षा विभाग द्वारा जारी की गई स्थानांतरण एवं पदस्थापना संबंधित नीतियों में व्याप्त विभिन्न त्रुटियों एवं विसंगतियों पर पत्राचार के माध्यम से विभाग का ध्यान आकृष्ट कराया है। हमारा मानना है कि शिक्षक हित में इन पर सुधार की सख्त आवश्यकता है और इसलिए हमने विभाग को लिखित में अपनी आपत्तियां दर्ज करवाई हैं। यहाँ हम आपके साथ इन प्रमुख बिंदुओं को साझा कर रहे हैं:

🌼 प्रमुख आपत्तियां:

1. लिंग आधारित भेदभाव:
   संविधान के मौलिक अधिकारों में स्पष्ट है कि किसी भी नागरिक के साथ जाति, धर्म, भाषा या लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। फिर भी, बिहार सरकार की ट्रांसफर/पोस्टिंग नियमावली में पुरुष शिक्षकों के साथ बड़े पैमाने पर भेदभाव किया गया है। क्या इस राज्य में पुरुष होना गुनाह है?

2. वर्ग आधारित विकल्प:
   क्यों किसी एक वर्ग को केवल पंचायत और किसी को अनुमंडल परिवर्तन का विकल्प मिल रहा है? पुरुष शिक्षकों को भी यह सुविधा मिलनी चाहिए। उन्हें गृह अनुमंडल की जगह गृह ब्लॉक की बाध्यता होनी चाहिए।

3. बीमारियों पर रियायत:
   क्यों केवल पति-पत्नी और बच्चों की बीमारी पर ही राहत दी गई है? जिनके बूढ़े माता-पिता गंभीर बीमारी से ग्रस्त हैं, उन्हें पोस्टिंग में रियायत नहीं दी गई। आखिर बुढ़ापे में उनकी देखभाल कौन करेगा?

4. दोहरी नीति:
   क्यों केवल नियमित और बीपीएससी अध्यापक को यह छूट दी गई है कि वे अपने वर्तमान पदस्थापित विद्यालय में रह सकते हैं, लेकिन विशिष्ट शिक्षक नहीं रह सकते, चाहे वे कितनी भी गंभीर बीमारी से ग्रसित क्यों न हों? यह दोहरी नीति हमें विभाजित करने की नई साजिश तो नहीं है?

5. मेरिट पर पदस्थापन:
   शिक्षा विभाग के पूर्व आदेश में कहा गया था कि सक्षमता के मार्क्स के आधार पर मेरिट बनाकर विशिष्ट शिक्षकों को शहरी क्षेत्र में पदस्थापित किया जाएगा। इस नियमावली में इसका कहीं कोई जिक्र क्यों नहीं है?

6. जबरन ट्रांसफर:
   प्रत्येक 5 साल में जबरन ट्रांसफर की पाबंदी क्यों? क्या यह कहीं विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों के लिए जबरन धन उगाही का दरवाजा तो नहीं खोल रहा? इसके लिए पूर्ण पारदर्शी तंत्र तैयार होना चाहिए, जिसमें किसी भी प्रकार से शिक्षकों का आर्थिक शोषण न हो।

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