बिहार के सरकारी विद्यालयों के शैक्षणिक कार्यों के संचालन के समय को लेकर शिक्षा विभाग के हालिया जारी आदेश पर शिक्षक समुदाय के बीच एक गंभीर बहस छिड़ चुकी है।अगर इस पत्र को ध्यान से देखें तो पत्र की पहली पंक्ति ही काफी हास्यास्पद प्रतीत होती है। इसके अनुसार दिनांक 15 अप्रैल 2024 से 15 मई 2024 तक ग्रीष्मावकाश के घोषित होने की बात कही गई है,जो शिक्षकों की समस्याओं पर एक कुठाराघात के समान है।शिक्षा विभाग के हालिया आदेशों में जिस प्रकार से शिक्षकों के साथ अमानवीय तरीके से व्यवहार किया जा रहा है यह पत्र उसकी अगली कड़ी प्रतीत होता है। वास्तव में शिक्षा व्यवस्था में सुधार के नाम पर विभाग के अधिकारी जिस प्रकार से अपनी मनमाने आदेशों एवं तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर शिक्षकों को प्रताड़ित करने का एक भी मौका नहीं चूक रहे हैं। आने वाले समय में यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि शिक्षकों में व्याप्त असंतोष और घोर निराशा एक बड़े आंदोलन की ओर अग्रसर है। किंतु विगत कुछ घटनाक्रमों पर गौर किया जाए तो ऐसा प्रतीत होता है की शिक्षक समुदाय की संघर्ष करने की शक्ति ही क्षीण हो चुकी है। अपने ऊपर हो रहे सारे अत्याचारों को मूकदर्शक बनकर सहते रहना कबूल है परंतु संघर्ष करने का मार्ग से वो भटक चुके हैं।
इसके अलावा इस पत्र में दूर दराज से आने वाले जाने वाले शिक्षकों के सामने भोजन की व्यवस्था एक गंभीर समस्या के रूप में सामने खड़ा है। टीचरनामा की टीम शिक्षा विभाग से यह अपील करती है की विभाग को इस पर ध्यान देते हुए ऐसे शिक्षकों को खाना मुहैया कराया जाना चाहिए ताकि वह शैक्षणिक कार्यों पर निश्चिंत होकर ध्यान केन्द्रित कर सकें।क्योंकि भूखे भजन कैसे होई गोपाला।
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