जरा शिक्षा विभाग के जिद्दी अधिकारीयों की हठधर्मिता देखिये इतनी भीषण गर्मी के बावजूद सिर्फ़ कागज पे स्कूल का समय 06 से 10 बजे तक किया गया है।उसके बाद मिशन दक्ष और विशेष कक्षाएँ पहले की तरह चलाने का इस भीषण जानलेवा गर्मी में क्या औचित्य है?
क्या मिशन दक्ष के बच्चे और बिहार के शिक्षक लौह पुरुष है? वास्तव में मिशन दक्ष एक ढोंग है। जमीनी हकीकत यह है की कोई भी बच्चा मिशन दक्ष की कक्षाओं के लिए छुट्टी के बाद रुकना नहीं चाहता। क्योंकि इससे मिशन दक्ष के बच्चे आपस में हीन भावना का शिकार हो रहे हैं।कमजोर बच्चों को तेज बच्चे से वर्ग में ही मदद लेने के लिए प्रेरित कराना चाहिए क्योंकि बच्चे सहपाठी से ज्यादा सीखते हैं। इससे बच्चों में परस्पर सहयोग की भावना का भी विकास होगा।
वास्तव में यह तुगलकी आदेश बिहार के अभिभावकों की भावनाओं के साथ सरकार का किया हुआ एक बेहूदा मजाक है। आखिर किस वजह से बिहार के बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है?क्या इस रक्तपिपासु पाठक की प्यास अभी तक नहीं बुझी?
पिछले 10 दिनो से लगभग सारे अखबारों में मासूम बच्चों के खून से लथपथ तस्वीर सुर्खियां बनी हुई हैं। लेकिन अज्ञात कारणों से शिक्षकों के साथ प्रतिशोध की आग में जल रहे एक सनकी अधिकारी के सनक की कीमत पूरे बिहार के मासूम बच्चे भी चुका रहे हैं। अब सरकार एवं विभाग की इतनी थू थू करवाने के बाद भी विभाग के अधिकारी के के पाठक के तलवे चाटने में मशगूल है। जिस वजह से एक बार फिर से उन्होंने लोकतंत्र का मजाक बनाते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश को ताख पर रखकर ऐसा भ्रमित करने वाला आदेश पारित किया है।
#RIP_Nitish_Govt
#TeachersLivesMatter
#ReviseSchoolTime
#RevokePathakRule
@NitishKumar @sunilkbv @BiharEducation_
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