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Sunday, May 19, 2024

BPSC TRE भर्ती में नया खुलासा। बिहार के युवाओं का हक खा गए बाहरी अभ्यर्थी।

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गजब का आरक्षण सिस्टम है बिहार का। बिहार के युवाओं के साथ इतना बड़ा धोखा!!! इससे बड़ी विडंबना क्या होगी की बेरोजगारी की मार से जूझ रहे बिहार में नौकरियां दूसरे राज्य के लोगों को थाली में परोस कर दे दी जाए और हमारे युवा नौजवान टकटकी लगाकर उम्मीद भरी निगाहों से देखते रह गए। क्या हमने अपने जनप्रतिनिधियों को इसी दिन के लिए चुना था की वे कौरव सभा की तरह बिहार के बेरोजगार युवाओं का चीरहरण होता मूकदर्शक बनकर देखते रहे। साथियों... इस बार सत्ता से ऐसी असंवेदनशील सरकार को जड़ से उखाड़ फेकना है। वोट बिहार के लोग दें, मुख्यमंत्री बिहार के वोट से बने हैं और नौकरी दूसरे राज्य के बच्चों को दे रहे हैं। पलटू राम की समूची पलटन को सत्ता के गलियारों से बेदखल करके ही बिहार के युवाओं की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले इन सत्ताधीशों को सबक सिखाया जा सकता है।


बिहार के नौजवान साथी ये आरटीआई का रिपोर्ट देख सकते है। इस रिपोर्ट में खुद बी.पी.एस.सी ने माना है कि BPSC TRE 1 के प्राइमरी में सामान्य श्रेणी की 7949 चयनित पुरुषों में लगभग 50 फीसदी यानी 3909 सीटों पर सिर्फ अन्य राज्य के अभ्यर्थियों ने कब्जा कर लिया। वहीं दूसरी तरफ महिला वर्ग में चयनित 17795 अभ्यर्थियों में से 10112 सीट यानी महिला वर्ग की आरक्षित 50% सीट में से 56% सीट दूसरे राज्य की महिलाओं को खैरात में बांट दी गई। नियमतः अन्य राज्य की महिलाओं को आरक्षण का लाभ नहीं देने का प्रावधान है। जबकि BPSC के तत्कालीन चेयरमैन महोदय ने सारे नियमों की अनदेखी करते हुए अन्य राज्य की महिलाओं को भी महिला आरक्षण का लाभ दे दिया।जो की सरासर नियम विरुद्ध है।
इन बहालियों पर क्रेडिट लेने को होड़ में तो सब आगे हैं लेकिन जब असलियत सामने आई तो सब एक दूसरे पर दोषारोपण कर रहे हैं।किंतु यह वाकई चिंताजनक स्थिति है। क्योंकि वजह चाहे जो भी रही हो सच्चाई यही है की बिहारियों की हकमारी हुई है और इस वजह से अन्य राज्य वालों की बल्ले बल्ले हो गई!

हद तो तब हो गई जब सरकार ने बेशर्मी से गलत डाटा दिखाकर वाहवाही लूट रही थी की इन बहालियों में अन्य राज्यों के मात्र 12 प्रतिशत लोग ही चयनित हुए है।गौरतलब है कि अन्य राज्य में ,यहां तक कि हमारे पड़ोसी राज्य में भी पिछली हुई बहालियों में बाहरी लोगों के लिए फॉर्म भरने पर रोक लगा दिया गया था। वही कुछ राज्य तो अपने सरकारी नौकरियों में 5 से 10 प्रतिशत सीट ही बाहरी अभ्यर्थियों को देते है।लेकिन नीतीश सरकार की दोहरी नीति ने बिहार के युवाओं के अरमानों का गला घोंटने का काम किया है।फिर आज चुनावी मौसम में किस आधार पर ये लोग बिहार की जनता से वोट मांग रहे है। विगत वर्षों में हुईं ये बहालियां बिहारियों के लिए नहीं बल्कि बाहरियों के लिए थी।वास्तव में करोड़ों की कमाई का एक जरिया था और है।जिससे इन राजनीतिक पार्टियों का चुनावी खर्च निकल सके। बिहार के लोग बाहर कमाने जाएं और बाहरी बिहार में नौकरी करें।बिहार सरकार की ये नीति अब जगजाहिर हो चुकी है।
जय हिन्द।
๑۩۞۩TeacherNama۩۞۩๑
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