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किसी भी विभाग के कर्मचारियों के लिए ऑफिस समय पर आने के लिए 5 से 15 मिनट का मार्जिन रखा जाता है। यहां तक कि प्राइवेट कंपनियों में भी मानवता के नाते अथवा सहानुभूति पूर्वक आपके लिए 10 से 15 मिनट के अंतराल का मार्जिन रखना स्वाभाविक है। क्योंकि रास्ते में कब जाम लग जाए, रेलवे फाटक लग जाए, कब आँख में धूल मिट्टी पड़ जाय या फिर थोड़ी दूर जाने के बाद पता चले कि टिफ़िन/मोबाइल घर पर छूट गया तो इस तरह के आपातकालीन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए 10 से 15 मिनट का मार्जिन तो बायोमेट्रिक अटेंडेंस तक में रखा जाता है।और होना भी चाहिए क्योंकि कभी-कभी ऐसा भी होता है कि 10 मिनट पहले पहुँचने पर गेट पर ताला लगा होता है तो शिक्षक को बाहर धूप में ही इंतज़ार करना पड़ता है।
एक आम इंसान में ये परिपक्वता होनी चाहिए बात को समझने की। तो फिर एक सीनियर आईएएस अधिकारी से तो इतनी अपेक्षा रखने में कोई गुरेज नहीं होनी चाहिए।
अगर एक सामान्य शिक्षक का उदाहरण लें तो वे आमतौर पर स्कूल की छुट्टी होने के आधे घंटे बाद विद्यालय छोड़ते हैं, कभी-कभी विशेष परिस्थितियों में 1 घंटे बाद भी और यहाँ तक कि स्कूल बंद होने के बाद उन्हें विद्यालय कार्य से कभी DEO ऑफिस तो कभी DPO तो कभी कोई मीटिंग अटेंड करने किसी ना किसी कार्य से विभागीय कार्यालयों के भी चक्कर लगाना पड़ता है। अगर उस कार्य के प्रति उनकी जवाबदेही नहीं हो फिर भी। क्योंकि स्कूल का कार्य है तो अपने विषय के अध्यापन के अलावा UDISE पोर्टल से संबंधित अपडेट्स, कंप्यूटर कार्य आदि भी उन्हें अपने निजी मोबाइल/लैपटॉप से करना पड़ता है। इन कार्यों में यदि अन्य गैर शैक्षणिक गतिविधियां जोड़ दी जाए जिसके लिए प्रायः किसी क्लर्क या लिपिक की नियुक्ति की जानी चाहिए (जो की सरकारी विद्यालयों में बीती जमाने की बाते हो चुकी हैं।) तो यह अंतराल और भी लंबा हो सकता है। इन सबके अतिरिक्त कई प्रकार के अन्य गतिविधियां जैसे चुनाव कार्य, जातिगत गणना इत्यादि के लिए तो समय की कोई गिनती ही नही है।
और इन सब के बदले उन्हें ईनाम में क्या मिलता है? किसी दिन 5 मिनट जाम में फँस जाने पर पूरे दिन का वेतन बंद।जी हाँ! 5 मिनट मतलब सिर्फ़ 5 मिनिट।
क्या ऐसी नकरात्मकता से भरे माहौल में आप स्कूल के प्रति तन-मन-धन से कार्य कर सकेंगे ? कोई टीचर 5 मिनट लेट भी है तो कम से कम उस टीचर का फीडबैक बच्चों से तो ले ही सकते हैं। लेकिन ये क्या बात हुई कि किसी का एक्सीडेंट भी हो जाए तो भी उसके एक दिन का वेतन काट लिया जाएगा। लेकिन टीचर के अच्छे कार्य करने पर कोई प्रोत्साहन नहीं, कोई प्रशंसा नहीं, कोई इंसेंटिव नहीं।
सिर्फ एक ही विधान... दन्ड, दन्ड और सिर्फ दन्ड। ये कहां तक उचित है जनाब?
आप एक IAS अधिकारी होकर किस स्तर की मानसिकता का उदाहरण देना चाह रहे हो? मेरी समझ से इसे मानसिक विक्षिप्त की श्रेणी में रखा जा सकता है। बाकी आप सभी खुद समझदार हैं।
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